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Covid-19: दिल्ली-मुंबई में घट रहे कोरोना केस, IIT मद्रास का दावा- R वेल्यू में भी कमी, क्या जल्द खत्म होगी महामारी?

Covid-19: जहां देश में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आर्थिक नगरी मुंबई में अब कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आ रही है. दिल्ली में रविवार को 18,286 कोविड मामले दर्ज किए गए जबकि शनिवार को यहां 20 हजार 718 नए मामले सामने आए थे. वहीं रविवार को पॉजिटिविटी रेट 27.87% रही जबकि शनिवार को यह 30.64% थी.

वहीं मुंबई में भी रविवार को कोरोना के मामलों में कमी दर्ज की गई. यहां बीते दिन 7 हजार 895 नए मामले सामने आए और 11 मरीजों की मौत हुई. जबकि शनिवार को यहां 10 हजार 661 नए मामले सामने आए थे. वहीं मुंबई में 57,534 टेस्ट के साथ दैनिक सकारात्मकता दर गिरकर 13 प्रतिशत हो गई है. अधिकारियों ने कहा कि शहर में कोरोना पीक पर है और अब मामलों में गिरावट देखने को मिल रही है.

IIT मद्रास का दावा वैल्यू हो रही कम

दिल्ली-मुंबई में कोरोना के मामले घटने के साथ ही आईआईटी मद्रास ने दावा किया है कि Rवैल्यू भी कम हो रही है. भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के प्रारंभिक विश्लेषण में ये बात सामने आई है कि भारत में R वैल्यू सात जनवरी से 13 जनवरी के बीत 2.2 दर्ज की गई जो पिछले दो हफ्तों से काफी कम है. गौरतलब है कि R वैल्यू यह इंगित है कि कोरोना कितनी तेजी से लोगों को संक्रमित कर रहा है. बता दें कि इस दौरान दिल्ली की R वैल्यू 2.5 और मुंबई की R वैल्यू 1.3 थी. बता दें कि अगर आर वैल्यू एक से नीचे चली जाती है तो महामारी को खत्म माना जाता है.

गौरतलब है कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का दावा भी रहा है कि अब दिल्ली में कोरोना की सकारात्मकता दर स्थिर हो रही है. वहीं मामलों में गिरावट की वजह कम संख्या में हो रहे टेस्ट माने जा रहा है. लेकिन आर वैल्यू के हिसाब से कहा जा सकता है कि महामारी की स्थिति में सुधार हो रहा है.

सरकार सख्त पाबंदियों को मान रही मामलों में गिरावट की वजह

दिल्ली और मुंबई में कम हो रहे मामलों को लेकर जहां सरकार का दावा है कि सख्य पाबंदियो के कारण केस में गिरावट दर्ज की जा रही है तो वहीं मीडया रिपोर्ट्स का दावा है कि इसके पीछे कारण टेस्टों में कमी है. पहले की तरह अब बिना लक्षण वाले मरीजों के टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं. ऐसे में सरकारी आंकड़ों और कोविड-19 के वास्तविक मरीजों की संख्या में बड़ा अंतर हो सकता है.

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