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कहीं बर्फ बन गया पानी, कहीं माइनस 5.2 पहुंचा तापमान, सर्द हवाओं के प्रकोप से बेहाल उत्तर भारत

इस वक्त पूरा उत्तर भारत जबरदस्त शीतलहर की चपेट में है. पहाड़ों पर तो बर्फबारी शुरू हो गई है. राजस्थान में कई जगहों पर पारा माइनस में चला गया है. फतेहपुर शेखावटी में तो पहली बार तापमान माइनस 5.2 हो गया, जिसके बाद पानी बर्फ में तब्दील हो गया. मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आने वाले दिनों में ठंड के और भी नए रिकॉर्ड बन सकते हैं.

राजधानी दिल्ली में जहां ठंड का रिकॉर्ड टूट गया है. वहीं पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी और एमपी के कुछ हिस्सों समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में शीतलहर जारी है. दिल्ली में न्यूनतम तापमान 3.2 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया.

महाराष्ट्र के नागपुर में ठंड का कहर देखा जा रहा है. न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. मौसम विभाग ने आज शीतलहर चलने की चेतावनी दी है.

उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों हर्षिल, झाला सुखी टॉप, मुखवा धराली समेत गंगोत्री में सुबह और शाम का पारा माइनस 0 डिग्री से नीचे पहुंच गया. पानी के पाइपों में बर्फ जमी नजर आई.

राजस्थान में मनाली जैसा मौसम

जो राजस्थान अपनी गर्मी के लिए जाना जाता है, इन दिनों वहां पेड़ों पर बर्फ जमी है. राजस्थान में कई जगह पारा माइनस में पहुंच गया है. खेतों में फसलों पर बर्फ की चादर दिखाई दे रही है. सीकर में तापमान -2.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है, जिससे नल से टपकता पानी भी जम गया है.

फतेहपुर शेखावटी में ठंड ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. पहली बार पारा माइनस पांच डिग्री से भी नीचे पहुंच गया. इससे पहले सबसे ठंडा दिन 30 दिसंबर 2014 रिकॉर्ड किया गया था, जब पारा माइनस 4.6 दर्ज हुआ था, लेकिन इस बार तो तापमान माइनस 5.2 पर पहुंच गया है.

17 तारीख को तापमान माइनस 1.6 रहा. 18 तारीख को माइनस 3.8. जो आज 7.30 बजे दर्ज किया गया वो माइनस 5.2 रहा है. ये शीतलहर जो चल रही है, मौसम विभाग ने कहा है कि 20 तारीख तक शीतलहर चलेगी. इतनी भयंकर ठंड होने से सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को हो रही है, फसलों की सिंचाई वो नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि पानी की पाइपलाइन में भी बर्फ जम गयी है. पाइप की भीतर का पानी और पाइप के ऊपर भी बर्फ जमी हुई है.

लद्दाख में जम गई नदी

ठंड का आलम यह है कि लद्दाख में नदी जम गई है. नदी के पानी की जम चुकी ऊपरी परत चांदी की तरह चमक रही है. जहां तक नदी पर नज़र जा रही है, वहां तक बर्फ ही बर्फ दिख रही है. देखने में तो जमी हुई नदी बहुत अच्छी लग रही है, लेकिन यहां के रहने वाले लोगों के लिए ये किसी मुसीबत से कम नहीं है. सबसे ज्यादा दिक्कत तो पीने के पानी की हो रही है.

इसके अलावा, जिनका खाने-पीने की चीजों का काम है, उन्हें भी बड़ी परेशानी है. तेल को गर्म करने में ज्यादा वक्त लग रहा है. इसलिए चीजें देर से बन रही हैं. रसोई गैस का खर्चा भी बढ़ गया है और नुकसान हो रहा है.

जम्मू में तो सर्दी ने पिछले 23 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. हड्डियां गला देने वाली ठंड के साथ कोहरा भी बड़ा जबरदस्त हो रहा है. आलम ये है कि सुबह-सुबह कोहरे और ठंड के चलते लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है. वहीं रेल और सड़क यातायात पर भी असर पड़ा है.

मध्यप्रदेश के होशंगाबाद का तापमान 0.5 डिग्री पहुंच चुका है. एमपी के ही रायसेन का तापमान 2.5 डिग्री दर्ज किया गया.

इतनी ज्यादा ठंड पड़ने की भविष्यवाणी मौसम वैज्ञानिकों ने पहले ही कर दी थी. इसकी वजह है ला नीना. मौसम में परिवर्तन लाने वाली एक जटिल प्रक्रिया का नाम है. ये स्पेनिश शब्द है. इसका मतलब होता है छोटी बच्ची.

ला-नीना का मौसम से संबंध

ला नीना की शुरुआत प्रशांत महासागर में होती है और इसका असर दुनियाभर के मौसमों पर होता है.
प्रशांत महासागर के बीच में मौजूद नीनो नाम के इलाके में मौसम संबंधी बदलाव होते हैं.
नीनो इलाके का तापमान बढ़ता है तो इसे अल नीनो कहा जाता है, ये गर्मी को बढ़ाता है.
नीनो इलाके का तापमान जब घटता है तो इसे ला नीना कहा जाता है, ये ठंड को बढ़ाता है.
तो इसी ला-नीना की वजह से उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में सर्दी सामान्य से अधिक रहने की संभावना बताई गई है. कहा यही जा रहा है कि प्रशांत महासागर का ‘ला नीना’ सामान्य से अधिक तेजी से ठंडा हो रहा है, जिसका असर अभी दिख रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिन और ज्यादा ठंडे रहने वाले हैं. सर्दी और ज्यादा बढ़ने वाली है.

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