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कृषि कानून पर किसानो ने ख़ारिज किया सरकार का प्रस्ताव, टकराव बढ़ने से आंदोलन होगा और तेज

नई दिल्ली I कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है. एक किसान ने बताया,”सरकार अभी भी लोगों की बात सुनने के लिए तैयार नहीं है. लोगों के ऊपर क्या प्रभाव पड़ रहा, क्या दिक्कत आ रही उस पर सरकार थोड़ा भी ध्यान नहीं दे रही है. सरकार जानबूझकर अड़ी हुई है.”

केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने बुधवार को दावा किया कि तीन नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग को लेकर जारी किसानों विरोध प्रदर्शनों के पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी(एनआरसी) को लेकर पहले मुसलमानों को गुमराह किया गया, लेकिन ये प्रयास सफल नहीं हुए. उन्होंने कहा कि अब किसानों को बताया जा रहा है कि नए कानूनों के कारण उन्हें नुकसान होगा. दानवे ने महाराष्ट्र के जालना जिले के बदनापुर तालुका में कोल्टे तकली स्थित एक स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन के दौरान ये बातें कहीं.

किसानों के प्रस्ताव खारिज करने के बाद मीटिंग का दौर जारी है. गृह मंत्री अमित शाह और कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के बीच मामले को लेकर करीब ढाई घंटे की मीटिंग चली. बैठक में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे. मीटिंग में आगे की रणनीति को लेकर चर्चा हुई. बीजेपी ने कृषि कानून में संशोधन को लेकर किसानों को प्रस्ताव भेजा था, जिसमें 5 मुख्य बातों में बदलाव की बात कही गई थी. सरकार ने MSP जारी रखने, APMC को मजबूत करने, प्राइवेट कंपनियों के रजिस्ट्रेशन की बात कही, जिस पर किसान संगठनों की बैठक हुई, जिसके बाद किसानों ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया.

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