उत्तराखंड

बदरीनाथ में नहीं होती वोटिंग, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह और जुड़ा है कौन सा मिथक

बदरीनाथ। Uttarakhand Election 2022 चमोली जिले की बदरीनाथ विधानसभा सीट राज्य गठन से पहले बदरी-केदार नाम से जानी जाती थी। 2002 में दशोली, जोशीमठ और गोपेश्वर नगर क्षेत्र को मिलाकर बनी इस सीट में परिसीमन के बाद 2012 में नंदप्रयाग सीट का पोखरी क्षेत्र भी जोड़ दिया गया। सीट का नाम भले ही बदरीनाथ हो, लेकिन बदरीनाथ के मतदाताओं के प्रवास में ही मतदान करने के चलते यहां कभी वोट नहीं पड़ा।

इसलिए है खास

चमोली जिले की बदरीनाथ विधानसभा सीट में जिला मुख्यालय गोपेश्वर के भी शामिल होने से इसे जिले की प्रमुख सीट माना जाता है। साथ ही बदरीनाथ नाम होने के कारण स्वाभाविक रूप से इसके वीआइपी होने का भाव भी आ जाता है। गंगोत्री की तरह इस सीट को लेकर भी मिथक है कि यहां से जिस दल का भी प्रत्याशी विधानसभा पहुंचता है, प्रदेश में उसी दल की सरकार बनती है।

रुझान

2003 और 2012 में कांग्रेस, 2007 व 2017 में भाजपा। वोटर ने हमेशा राष्ट्रीय दलों पर ही भरोसा किया। यहां 102128 वोटर हैं। इनमें 52626 पुरुष, 49499 महिला व तीन थर्ड जेंडर शामिल हैं।

राजनीतिक इतिहास

बदरीनाथ सीट पर भाजपा और कांग्रेस, दोनों का दबदबा रहा। 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डा.अनुसुया प्रसाद मैखुरी ने भाजपा प्रत्याशी तत्कालीन काबीना मंत्री केदार सिंह फोनिया को हराया था। 2007 में भाजपा प्रत्याशी फोनिया ने कांग्रेस प्रत्याशी मैखुरी को हराकर सीट पर कब्जा किया। 2012 में कांग्रेस के राजेंद्र भंडारी व 2017 में भाजपा के महेंद्र भट्ट यहां से चुनाव जीते।

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