उत्तराखंड

घर छोड़कर जाने वाले नेताओं के लिए कांग्रेस के दरवाजे खुले, भाजपा की बढ़ी चिंता

देहरादून। कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्य रहे यशपाल आर्य के अपने विधायक पुत्र संजीव के साथ कांग्रेस में लौटने के कदम से भाजपा असहज है। खासकर, कांग्रेस पृष्ठभूमि के विधायकों, जिनमें कई मंत्री भी शामिल हैं, के तेवर पिछले कुछ महीनों के दौरान जिस तरह तमाम मुद्दों पर तल्ख रहे हैं, उससे भाजपा नेतृत्व की इन्हें पालाबदल से रोकने की चिंता बढ़ गई है। अब जबकि कांग्रेस ने घर छोड़कर जाने वाले नेताओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं, ऐसा होना स्वाभाविक भी है। समझा जा रहा है कि अब ये नेता विधानसभा चुनाव तक अपनी शर्तों को लेकर भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति अमल में ला सकते हैं।

उत्तराखंड की सियासत पांच साल बाद फिर खुद को दोहराती नजर आ रही है। मार्च 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा समेत नौ विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद तत्कालीन कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य समेत दो विधायक कांग्रेस से भाजपा में चले गए। भाजपा ने तब इनके साथ किए गए अपने कमिटमेंट को पूरा किया और सभी को वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट दिया। यही नहीं, इनमें से पांच को मंत्री भी बनाया गया। यह बात दीगर है कि इनमें से कुछ को छोड़कर ज्यादातर भाजपा की रीति-नीति को लेकर लगातार असहज दिखे।

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