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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की समय से पहले सत्ता से विदाई तय, अमेरिकी हाउस में महाभियोग का प्रस्ताव हुआ पेश

वाशिंगटन : यूएस कैपिटल में गत बुधवार को हुई हिंसा के लिए डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पद से हटाने के लिए महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया है। अमेरिकी हाउस में यह प्रस्ताव सोमवार को पेश हुआ। इस प्रस्ताव में ट्रंप पर ‘फसाद के लिए उकसाने’ का आरोप लगा है। हाउस की स्पीकर एवं डेमोक्रेट सांसद नैसी पेलोसी का कहना है कि ‘राष्ट्रपति अमेरिकी संविधान, देश और लोगों के लिए एक खतरा हैं और उन्हें ऑफिस से तुरंत हटाया जाना चाहिए।’

यूएस कैपिटल में गत बुधवार को हुई हिंसा
ट्रंप समर्थकों की हिंसा जिसमें पांच लोगों की मौत हुई है, उन्हें पद से हटाए जाने की मांग तेज हुई है। डेमोक्रेट सांसदों के अलावा कुछ रिपब्लिकन भी ट्रंप को पद से हटाए जाने के पक्ष में हैं। ह्वाइट हाउस ने राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग के खतरे को ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताकर खारिज किया है। हालांकि, ट्रंप ने इस बारे में सार्वजनिक रूप से कोई बयान दिया है। दरअसल, ट्विटर सहित ज्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों ने उन पर प्रतिबंध लगा दिया है। ट्रंप ने कहा है कि वह आगामी 20 जनवरी को ‘व्यवस्थित तरीके से सत्ता का हस्तांतरण’ कर देंगे।

ट्रंप के खिलाफ दूसरी बार आया महाभियोग
उन्होंने कहा है कि वह जो बिडेन के शपथग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगे। बता दें कि यह दूसरा मौका है जब डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चलाने की प्रक्रिया शुरू की है। दिसंबर 2019 में हाउस ने पद के दुरुपयोग एवं कांग्रेस के कामकाज में अवरोध खड़ा करने के आरोपों पर ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था लेकिन फरवरी में सीनेट ने उन्हें दोनों आरोपी से बरी कर दिया। अमेरिकी इतिहास में अब तक किसी भी राष्ट्रपति के खिलाफ दो बार महाभियोग प्रस्ताव नहीं लाया गया है।

प्रतिनिधि सभा के 211 सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया
महाभियोग प्रस्ताव सांसद जैमी रस्किन, डेविड सिसिलीन और टेड ल्यू लेकर आए हैं और इसका समर्थन अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के 211 सदस्यों ने किया है। मीडिया में जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस प्रस्ताव में निर्वतमान राष्ट्रपति पर अपने कदमों के जरिए छह जनवरी को ‘ राजद्रोह के लिए उकसाने’ का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि ट्रंप ने अपने समर्थकों को कैपिटल बिल्डिंग (संसद परिसर) की घेराबंदी के लिए तब उकसाया, जब वहां इलेक्टोरल कॉलेज के मतों की गिनती चल रही थी और लोगों के धावा बोलने की वजह से यह प्रक्रिया बाधित हुई। इस घटना में एक पुलिस अधिकारी समेत पांच लोगों की मौत हो गई।

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