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जाने कांग्रेस पार्टी के लिए किसान आन्दोलन के मायने, कितना पहुचेगा फायदा, किस पार्टी को होगा नुकसान

नई दिल्ली I नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन को लेकर कांग्रेस आक्रामक है। पार्टी तीनों कृषि कानूनों का शुरुआत से विरोध कर रही है, पर किसान आंदोलन ने कांग्रेस के रुख को और आक्रामक बना दिया है। केंद्र सरकार के खिलाफ इस आंदोलन को कांग्रेस अपने राजनीतिक फायदे के लिए एक उम्मीद की किरण के तौर पर देख रही है। हालांकि, पार्टी को इससे बहुत ज्यादा सियासी फायदे की उम्मीद नहीं है।

कांग्रेस ने किसान आंदोलन का समर्थन किया है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी साफ तौर पर कार्यकर्ताओं से सत्य और असत्य की इस लड़ाई में किसानों का साथ देने की अपील कर चुके हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का थोड़ा बहुत लाभ पंजाब और हरियाणा में मिल सकता है। पर, इन दोनों राज्यों में चुनाव अभी बहुत दूर हैं।

इस आंदोलन में कांग्रेस को एक उम्मीद की किरण दिख रही है। यूपीए-दो सरकार के दौरान हुए अन्ना आंदोलन के बाद यह पहला आंदोलन है, जिसे पूरे देश से समर्थन मिल रहा है। पार्टी नेता मानते हैं कि यह एक अच्छा संकेत है। इससे केंद्र सरकार का यह भ्रम टूटा है कि उनके सभी फैसले सही हैं। ऐसे में आने वाले वक्त में सरकार कोई और गलती करती है, तो विरोध के स्वर तेज होंगे। सीएए को लेकर भी पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे, पर उसका असर बहुत व्यापक नहीं था।

कृषि कानूनों को संसद की मंजूरी के बाद कांग्रेस लगातर इनका विरोध कर रही है। पार्टी ने इन कानूनों के खिलाफ लगभग सभी प्रदेशों में आंदोलन भी किए। पार्टी नेता ने कहा कि आंदोलन के दौरान हमें इतनी बड़ी संख्या में किसानों के सड़कों पर उतरने की उम्मीद नहीं थी। पर यह एक बड़ा आंदोलन बना। इसमें पंजाब, हरियाणा और यूपी के किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है।

इस सबके बावजूद पार्टी रणनीतिकार मानते हैं कि आंदोलन का राजनीतिक तौर पर असर बहुत ज्यादा नहीं होगा। मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मंदसौर में किसानों का बड़ा आंदोलन हुआ था। पुलिस फायरिंग में पांच किसानों की मौत भी हुई, लेकिन आंदोलन के कुछ अरसे बाद हुए विधानसभा चुनाव पर इसका बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा।

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